संन्यास का अर्थ भगोडा नही होता ।
-- संन्यास के विषय मे एक धारणा बन गई है , संन्यासी का मतलब होता है भगोडा , सब छोड-छाड कर भाग जाने वाला , पलायनवादी । संन्यास का यह अर्थ नही होता है । संन्यास का अर्थ होता है परमात्मा पर सब छोड देना । कृष्णार्पनमस्तु का अर्थ यही है की जो मैने कीया है वह तेरे आदेश से ही कीया है , तेरे लिए ही कीया है , मै तो एक निमीत्तमात्र हुं । --- एक बार एक सज्जन को संसार से विरक्ती हुयी और वह एक महात्मा के पास पहुंचे । बोलने लगे की महाराज मेरा अब भौतीक चिजों मे कुछ मन नही लगता , मुझे अब अध्यात्मीक होना है , संन्यास लेना है , आप मुझे गुरु दिक्षा देने की कृपा करे और मुझे मार्ग बताएं । महात्मा ने ऊसके मन की बात भांप ली और कहने लगे की आप यदि घर-द्वार छोडकर जंगलों मे भटकना चाहते है , तो मै लाख कोशीश करु , फीर भी आप मुक्ती के राह पर नही चल पाओगे। आपको यदी वास्तव मे मुक्ती की अभीलाषा है तो अपने पारीवारीक दाईत्वों का नीर्वाह किए बिना आपको मुक्ती नही मिल सकती । अतः आपको पारीवारीक जीवन जीते हुए ही संन्यास लेना है । सज्जन ने महात्मा की बात मान ली और गुरु दिक्षा लेकर अपने घर की ओर प्रस्थान कर गये । -...